बीकानेर : करणी माता मंदिर: चूहों के मंदिर के नाम से विख्यात :आस्था, संस्कृति और इतिहास का अद्वितीय संगम
“बीकानेर का करणी माता मंदिर: चूहों के मंदिर के नाम से विख्यात – आस्था, संस्कृति और इतिहास का अद्वितीय संगम“
बीकानेर से लगभग ३० किलोमीटर दक्षिण में, देशनोक में स्थित करणी माता मंदिर एक अनोखा धार्मिक स्थल है। यह मंदिर करणी माता को समर्पित है, जिन्हें काली या दुर्गा माता का अवतार माना जाता है। मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता यहa है कि यहाँ चूहों की पूजा की जाती है, जिन्हें श्रद्धालु प्यार से “काबा” कहते हैं।
इतिहास और किंवदंतियाँ
15वीं सदी से जुड़ा माना जाने वाला यह मंदिर, स्थानीय कथाओं के अनुसार, करणी माता के आशीर्वाद से समृद्ध है। कहा जाता है कि अपने जीवन में एक बार करणी माता ने अपने भक्तों को दर्शन दिए थे और यह कहा था कि मृत्यु के पश्चात् वे चूहों के रूप में पुनर्जन्म लेंगे। इसी दिव्यता की वजह से मंदिर में चूहों को पवित्र स्थान प्राप्त हुआ है।
वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत
राजस्थानी शैली की छाप छोड़ता यह मंदिर सफेद संगमरमर से निर्मित है और अपनी जटिल नक्काशी तथा भव्य मंडप के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर का मुख्य गर्भगृह और सज्जित मंडप भक्तों को एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करते हैं। दीवारों पर उकेरी गई कलात्मकता स्थानीय संस्कृति और परंपरा की झलक दिखाती है।
चूहों का महत्व
यह मंदिर दुनिया के कुछ अनूठे स्थलों में से एक है, क्योंकि यहाँ लगभग 25,000 चूहे निवास करते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि किसी चारण की मृत्यु होने पर उसका पुनर्जन्म एक चूहे के रूप में होता है, और विशेष रूप से सफेद चूहे को शुभ माना जाता है। भक्तजन चूहों को दूध, मिठाई और अन्य भोग अर्पित करते हैं। मंदिर परिसर में चूहे स्वतंत्र रूप से घूमते हैं, परन्तु उनकी सुरक्षा के लिए खुले क्षेत्रों में बारीक जाली का प्रबंध किया गया है, जिससे चील, गिद्ध एवं अन्य शिकारी पक्षियों से इन्हें बचाया जा सके।
धार्मिक आयोजन और भक्तिभाव
हर दिन सुबह और शाम की आरती में भरपूर संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। विशेषकर नवरात्रि जैसे पर्वों के दौरान यहाँ पर बड़े पैमाने पर उत्सव मनाए जाते हैं। भक्तों की निरंतर भीड़ और यहाँ की अनूठी पूजा पद्धति, करणी माता मंदिर को आस्था, संस्कृति और इतिहास का संगम बनाती है।
यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि स्थानीय संस्कृति, पुरानी किंवदंतियों और अद्वितीय वास्तुकला का जीवंत उदाहरण भी है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था के साथ यहाँ आते हैं, जिससे यह स्थल भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का एक अनमोल हिस्सा बन चुका है।
