अयोध्या: राम जन्मभूमि परिसर में आज देव प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा के साक्षी बनेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
“अयोध्या राम मंदिर में राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा आज, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रहेंगे उपस्थित“
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर में आज गुरुवार को राम दरबार की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं मौजूद रहेंगे और भगवान श्रीराम का आशीर्वाद लेंगे। संयोग से आज मुख्यमंत्री का 53वां जन्मदिन भी है, जिसे वह इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन के साथ मनाएंगे।
त्रयोदशी जन्मोत्सव की धूम और वैदिक अनुष्ठान
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा समारोह सुबह 11 बजे शुरू हुआ, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष हवन, पूजा-अर्चना और देव विग्रहों की स्थापना की गई। साथ ही अयोध्या में सरयू नदी के किनारे त्रयोदशी जन्मोत्सव की भव्य धूम रही। नदी तट पर विशेष आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री योगी ने लौटाया अयोध्या का गौरव
संत-महंतों और तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न सिर्फ राम मंदिर निर्माण को गति दी, बल्कि अयोध्या के आध्यात्मिक और भौतिक विकास से इसका खोया हुआ गौरव भी लौटाया है। बीते आठ वर्षों में 32,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं ने अयोध्या को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर एक नई पहचान दी है।
सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। एटीएस, सीआईएसएफ, पीएसी और सिविल पुलिस बलों की टीमें तैनात की गई हैं। मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाया गया है, और निगरानी के लिए आधुनिक उपकरणों का सहारा लिया गया है।
“अब योगी महाराज प्रभु राम का तिलक करेंगे”
संस्थान अध्यक्षों और महंतों के अनुसार, पहले वशिष्ठ जी ने राजा राम का राजतिलक किया था, अब यह कार्य योगी आदित्यनाथ करेंगे, जो स्वयं एक सन्यासी और आध्यात्मिक नेता हैं। महंत मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि प्रदेश का मुखिया आध्यात्मिक मूल्यों को आत्मसात करके उसे ऊर्जा दे रहा है।
इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे हैं। समारोह के लिए भव्य पंडाल सजाया गया है और राम दरबार की मूर्तियों को भक्तिभाव के साथ प्रतिष्ठित किया गया है।
यह आयोजन केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि यह भारतीय सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का प्रतीक भी बन गया है।
