AQI के आंकड़ों पर सवालों के घेरे में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, 1000 पार होने पर CPCB ने क्या कहा?
“AQI के आंकड़ों पर सवालों के घेरे में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, 1000 पार होने पर CPCB ने क्या कहा?“
दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के आंकड़े लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं, और हाल ही में AQI का स्तर 1000 के पार जाने से स्थिति और भी गंभीर हो गई है। इस पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों और उनके द्वारा की गई घोषणाओं पर सवाल उठने लगे हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिम्मेदार संस्था पर यह आरोप है कि वह वायु गुणवत्ता के सही आंकड़े और उपायों को लेकर सही समय पर कार्रवाई नहीं कर रही है।
क्या था मुद्दा?
दिल्ली में इस समय AQI का स्तर 1000 के आसपास पहुंच चुका है, जिसे “आपातकालीन” श्रेणी में रखा जाता है। इस आंकड़े के पार होने का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर इतनी उच्च दर पर पहुंच चुका है कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरनाक हो सकता है। ऐसे में, CPCB की भूमिका और आंकड़ों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह संस्था वायु प्रदूषण की वास्तविक स्थिति को सही तरीके से प्रतिबिंबित कर रही है।
CPCB का बयान
इस पर CPCB ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे दिल्ली और अन्य शहरों में वायु गुणवत्ता की लगातार निगरानी कर रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि “दिल्ली में AQI का 1000 पार जाना एक असामान्य घटना नहीं है, खासकर सर्दी के मौसम में, जब पराली जलाने और अन्य कारणों से प्रदूषण बढ़ता है।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्रदूषण के इस स्तर पर स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है और तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।
AQI 1000 का क्या मतलब है?
AQI 1000 का मतलब है कि हवा में Particulate Matter (PM) का स्तर इतना अधिक हो जाता है कि यह सीधे स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है। इस स्तर पर, सांस लेने में कठिनाई, अस्थमा, सीने में जलन, खांसी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसे “आपातकालीन” स्तर का प्रदूषण माना जाता है, और ऐसे में सभी को घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है।
CPCB की भूमिका पर उठे सवाल
जब AQI 1000 के आंकड़े को पार करता है, तो यह सवाल खड़ा होता है कि क्या CPCB इस आंकड़े की सही स्थिति को सही समय पर जनता के सामने ला रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण की गंभीरता को समय रहते आंकने और उसे रोकने के लिए ज्यादा त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। पहले भी CPCB की आलोचना की जाती रही है, जब प्रदूषण से संबंधित रिपोर्ट्स और आंकड़े अपेक्षित समय पर सामने नहीं आए थे।
CPCB के उपाय
हालांकि CPCB ने दिल्ली और अन्य राज्यों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई उपायों की घोषणा की है, जैसे:
- पराली जलाने पर प्रतिबंध और किसानों के लिए वैकल्पिक उपायों को बढ़ावा देना।
- धूल नियंत्रण के लिए निर्माण स्थलों पर सख्त निगरानी रखना।
- वाहन प्रतिबंध जैसे उपायों के जरिए प्रदूषण को नियंत्रित करने की कोशिश करना।
इन उपायों के बावजूद, दिल्ली में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है और इसके समाधान के लिए और अधिक कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
दिल्ली में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर और AQI 1000 के आंकड़े ने CPCB की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा किया है। अगर CPCB समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाता, तो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। प्रदूषण से लड़ने के लिए सरकारी स्तर पर तेज़ और ठोस उपायों की आवश्यकता है, ताकि दिल्लीवासियों की सेहत पर इसका बुरा असर न पड़े।
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