CBI रिश्वत केस में सुप्रीम कोर्ट ने जांच के तरीके और सबूतों की विश्वसनीयता को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने पूर्व रेलवे सुरक्षा बल (RPF) अधिकारी भारत राज मीणा को भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी कर दिया। मामला 2005 में दर्ज CBI की भ्रष्टाचार जांच से जुड़ा था।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिस्वर सिंह की पीठ ने 16 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन रिश्वत की मांग और स्वीकार करने से जुड़े जरूरी तथ्यों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया।
CBI रिश्वत केस में ट्रैप ऑपरेशन पर सवाल
मामले में आरोप था कि RPF कर्मियों से ट्रांसफर, पोस्टिंग और अन्य सेवा संबंधी लाभ के बदले अवैध रकम मांगी गई। CBI ने 4 अगस्त 2005 को FIR दर्ज की और उसी दिन ट्रैप ऑपरेशन किया।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि तेजी से कार्रवाई करना अपने-आप में गलत नहीं है। हालांकि, इस मामले में ट्रैप जिस तरह किया गया, उससे जुड़े संदेहों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि रिश्वत की रकम सीधे आरोपी अधिकारी से बरामद नहीं हुई।
रकम एक कथित बिचौलिए के पास मिली थी।
बिचौलिए से रकम मिलना पर्याप्त नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने CBI रिश्वत केस में स्पष्ट किया कि केवल बिचौलिए के पास
रकम मिलने से सरकारी कर्मचारी का अपराध साबित नहीं होता।
अभियोजन को यह साबित करना जरूरी है कि बिचौलिया
आरोपी के निर्देश या उसके लाभ के लिए काम कर रहा था।
कोर्ट ने पाया कि इस मामले में रिश्वत की मांग और स्वीकार्यता से जुड़े जरूरी तथ्य पर्याप्त रूप से स्थापित नहीं हुए।
इसी आधार पर अपील स्वीकार करते हुए भारत राज मीणा को आरोपों से बरी कर दिया गया।
FAQ
CBI रिश्वत केस का फैसला कब आया?
सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया।
किस अधिकारी को बरी किया गया?
पूर्व RPF अधिकारी भारत राज मीणा को आरोपों से बरी किया गया।
कोर्ट ने बिचौलिए को लेकर क्या कहा?
केवल बिचौलिए से रिश्वत की रकम मिलना सरकारी कर्मचारी का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

