US-Iran War के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर तेजी से दिखाई दे रहा है। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार करते हुए 101.21 डॉलर पर बंद हुआ। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड 96.05 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। मध्य पूर्व में तेल सुविधाओं और जहाजों पर हुए नए हमलों के बाद आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। खास तौर पर Strait of Hormuz में शिपिंग बाधित होने से बाजार चिंतित है। इस समुद्री रास्ते से संघर्ष से पहले दुनिया की तेल आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता था।
US-Iran War के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका में रेगुलर गैसोलीन का औसत भाव 4.22 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गया, जबकि डीजल का औसत भाव 5.94 डॉलर दर्ज किया गया। महंगा तेल केवल वाहन चालकों को प्रभावित नहीं करता। इससे माल ढुलाई, विमानन, खेती, खाद्य उत्पाद और ऑनलाइन डिलीवरी की लागत भी बढ़ सकती है। लंबे समय तक तेल की ऊंची कीमतें वैश्विक महंगाई को और बढ़ा सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि US-Iran War के कारण तेल आपूर्ति और प्रमुख शिपिंग मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहते हैं, तो कीमतों में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
FAQ
सवाल: US-Iran War से तेल महंगा क्यों हो रहा है?
जवाब: मध्य पूर्व में हमलों और तेल आपूर्ति के महत्वपूर्ण मार्गों पर खतरे के कारण बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है।
सवाल: क्या पेट्रोल-डीजल और महंगे हो सकते हैं?
जवाब: कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहा तो कई देशों में ईंधन और परिवहन लागत पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

