बलूचिस्तान संकट: सिलसिलेवार हमले, प्राकृतिक संसाधन और चीन-अमेरिका की चिंता
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सिलसिलेवार हमले एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हालिया हिंसा में 31 नागरिकों और 17 सुरक्षाकर्मियों की मौत की पुष्टि हुई है। प्रांतीय सरकार का दावा है कि जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने 145 से अधिक हमलावरों को मार गिराया।
इन घटनाओं की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली है। संगठन ने अपने अभियान को “हेरोफ 2.0” या “काला तूफान” नाम दिया है। हालांकि, बीएलए के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
बलूचिस्तान में सिलसिलेवार हमले केवल सुरक्षा समस्या नहीं हैं। इसके पीछे लंबे समय से चला आ रहा संसाधनों का विवाद भी है। यह प्रांत गैस, तांबा, सोना और कोयले जैसे खनिजों से समृद्ध है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों को बिजली, गैस और रोजगार की पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पाती।
यूनिवर्सिटी ऑफ सिंध के विश्लेषण के अनुसार, बलूचिस्तान पाकिस्तान की 17% गैस सप्लाई करता है, लेकिन खुद केवल 7% गैस का उपयोग करता है। यही असमानता स्थानीय असंतोष को बढ़ाती है।
चीन और अमेरिका जैसे देश भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। ग्वादर पोर्ट और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा इस क्षेत्र को रणनीतिक रूप से अहम बनाते हैं। लगातार हो रहे हमलों से इन परियोजनाओं की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
यह रिपोर्ट vishwashprakash | Amit kumar द्वारा तैयार की गई है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. बलूचिस्तान में सिलसिलेवार हमले क्यों हो रहे हैं?
A1. स्थानीय असंतोष, संसाधनों का असमान वितरण और राजनीतिक उपेक्षा इसके मुख्य कारण हैं।
Q2. इन हमलों की जिम्मेदारी किसने ली है?
A2. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है।
Q3. चीन और अमेरिका क्यों चिंतित हैं?
A3. क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति और बड़े निवेश प्रोजेक्ट्स के कारण।
