वैश्विक अस्थिरता के बीच जी4 देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधार पर जोर दिया
“जी4 देशों ने यूएनएससी में तत्काल सुधार की मांग दोहराई, वैश्विक अस्थिरता के बीच प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर“
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के दौरान ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान के विदेश मंत्रियों ने एक अहम बैठक कर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर, ब्राजील के माउरो विएरा, जर्मनी के जोहान वेडफुल और जापान के इवाया ताकेशी शामिल हुए। जी4 देशों के मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि वैश्विक व्यवस्था में बढ़ती अस्थिरता और संयुक्त राष्ट्र की घटती प्रभावशीलता के बीच सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधार जरूरी हो गया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए परिषद का विस्तार स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में होना चाहिए, जिससे इसकी प्रतिनिधित्व क्षमता, वैधता, प्रभावशीलता और दक्षता को बढ़ाया जा सके। जी4 देशों ने यह भी रेखांकित किया कि अधिकांश सदस्य देश इस सुधार प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं।
मंत्रियों ने विकासशील देशों और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले देशों की भूमिका को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अफ्रीका, एशिया-प्रशांत, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन जैसे कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों के लिए सदस्यता में सुधार की वकालत की और ‘एजुलविनी सहमति’ व ‘सिर्ते घोषणा’ में निहित कॉमन अफ्रीकन पोज़िशन के प्रति अपने समर्थन को दोहराया।
बैठक में यह भी कहा गया कि सुरक्षा परिषद में सुधार सभी के हित में है। जी4 देश लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और बहुपक्षवाद के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं।
विदेश मंत्रियों ने अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) में अब तक हुई सीमित प्रगति पर चिंता जताई और कहा कि सुरक्षा परिषद सुधार पर चर्चा को केवल आईजीएन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्होंने महासभा सहित अन्य मंचों पर भी इस मुद्दे पर व्यापक सदस्यता के साथ संवाद जारी रखने की इच्छा जताई।
