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समुद्री मछली उत्पादन में गुजरात दूसरे स्थान पर, 2024-25 में 10.37 लाख टन का अनुमान

ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में गुजरात का मजबूत कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में ब्लू इकोनॉमी के विकास को एक नई दिशा देने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने हाल ही में कहा कि भारत ऐसा भविष्य गढ़ रहा है, जिसमें ब्लू इकोनॉमी, ग्रीन प्लेनेट के निर्माण का एक अहम माध्यम बनेगी। इस दृष्टि से गुजरात, जिसकी समुद्री तटरेखा देश में सबसे लंबी 2340.62 किलोमीटर है, महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

गुजरात सरकार, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में, मछुआरों की आय बढ़ाने और मत्स्य उद्योग को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इन पहलों के चलते गुजरात अब समुद्री मछली उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

उत्पादन और विकास के आंकड़े:
पिछले चार वर्षों में गुजरात का औसत वार्षिक मत्स्य उत्पादन 8.56 लाख मीट्रिक टन रहा है। वर्ष 2023-24 में राज्य में कुल मछली उत्पादन 9.07 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा, जबकि वर्ष 2024-25 के लिए 10.36 लाख मीट्रिक टन का अनुमान है।

केंद्र की भूमिका:
देशभर में मछुआरों की आय बढ़ाने और मत्स्य उद्योग को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत उत्पादन, गुणवत्ता, तकनीक, मार्केटिंग और ढांचे के विकास जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया है।

गुजरात में 2020-25 के दौरान इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार ने 897.54 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। वर्ष 2025-26 के लिए अतिरिक्त 50 करोड़ रुपये की सहायता भी प्रदान की गई है।

राज्य सरकार की पहलें:
गुजरात सरकार ने डीजल-वैट में छूट, ईंधन सब्सिडी, झींगा पालन के लिए भूमि आवंटन, सड़क-बिजली सुविधाएं, और छोटे मछुआरों के लिए बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे में सुधार जैसे कई प्रोत्साहन कार्यक्रम शुरू किए हैं। इसके अतिरिक्त चार नए मत्स्य बंदरगाहों—माढवाड़, नवाबंदर, वेरावल-2 और सूत्रापाडा—का निर्माण भी चल रहा है।

नवीनतम योजनाएं (2025-26):

  • बायोफ्लॉक और RAS सिस्टम के लिए सहायता
  • झींगा तालाब तैयार करने हेतु सामग्री व पोषण सहायता
  • केज कल्चर, बोट बिल्डिंग यार्ड, कोल्ड स्टोरेज
  • नाव-जाल वितरण, मछली उप-उत्पाद इकाइयां, सी-वीड बैंक और कल्चर योजनाएं

इन सभी पहलों का उद्देश्य न केवल मत्स्य उत्पादन को बढ़ाना है, बल्कि सागर आधारित आजीविका को स्थिरता और समृद्धि की ओर ले जाना भी है। गुजरात का यह मॉडल भारत के अन्य तटीय राज्यों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।

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