भारत दबाव में नहीं करता व्यापार समझौते, किसानों और एमएसएमई के हित सर्वोपरि: सरकारी अधिकारी

भारत सरकार ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि देश किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव या समयसीमा के तहत व्यापार समझौते नहीं करता है। अधिकारियों ने कहा कि किसानों, डेयरी क्षेत्र और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के हितों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

भारत को अमेरिकी टैरिफ वृद्धि से नहीं है चिंता

अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका द्वारा 1 अगस्त से लागू की गई 25 प्रतिशत टैरिफ वृद्धि भारत के लिए चिंता का विषय नहीं है। पाकिस्तान और बांग्लादेश को दिए गए कम टैरिफ से भी भारत के बाजारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

जेनेटिकली मोडिफाइड फसलों पर भारत का सख्त रुख

सरकारी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत जेनेटिकली मोडिफाइड फसलों के आयात की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि और खाद्य सुरक्षा नीति किसानों के हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में सकारात्मक रुख

अगस्त के अंत में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता का अगला दौर प्रस्तावित है। अधिकारियों को उम्मीद है कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगी और कुछ क्षेत्रों में राहत मिल सकती है।

यूके के साथ एफटीए को बताया ‘गेम-चेंजर’

हाल ही में भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच संपन्न मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को सरकार ने ‘गेम-चेंजर’ बताया है। यह समझौता किसानों, एमएसएमई, मछुआरों और युवा पेशेवरों के लिए नए अवसर खोलता है।

पीयूष गोयल ने ‘डेड इकोनॉमी’ टिप्पणी को किया खारिज

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिकी राष्ट्रपति की “डेड इकोनॉमी” टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि भारत अब विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जल्द ही तीसरे स्थान पर होगा। उन्होंने संसद में कहा कि भारत ने UAE, UK, ऑस्ट्रेलिया और EFTA देशों के साथ लाभकारी FTA समझौते किए हैं।

सरकार किसानों और ‘मेक इन इंडिया’ को दे रही प्राथमिकता

गोयल ने कहा कि भारत सरकार किसानों की सुरक्षा और उनके सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

इस वर्ष के अंत तक भारत-अमेरिका व्यापार समझौता संभव

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, भारत और अमेरिका एक पारस्परिक लाभकारी व्यापार समझौते को वर्ष 2025 के अंत तक अंतिम रूप देने के प्रयास में हैं, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध और प्रगाढ़ होंगे।

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