प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना : 9,189 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता से मछली पालन को बढ़ावा, 11 एक्वापार्क को मंजूरी
“प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 21,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत, 11 राज्यों में बनेंगे इंटीग्रेटेड एक्वापार्क”
भारत सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत अब तक ₹21,274.16 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से ₹9,189.79 करोड़ की राशि केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई है। यह जानकारी मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।
यह स्वीकृति 2020-21 से 2024-25 की अवधि के दौरान दी गई, और इसका उद्देश्य देशभर में मत्स्य क्षेत्र का समग्र, आधुनिक और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना है।
सहायता का वितरण अनुपात
- सामान्य राज्यों में केंद्र और राज्य सरकारों का अनुपात 60:40 है।
- पूर्वोत्तर राज्यों में यह अनुपात 90:10 है।
- केंद्र शासित प्रदेशों में 100% केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषण किया जाता है।
11 राज्यों में इंटीग्रेटेड एक्वापार्क को मंजूरी
सरकार ने योजना के तहत 11 राज्यों में 11 इंटीग्रेटेड एक्वापार्क की स्थापना को भी मंजूरी दी है। इनकी कुल लागत ₹682.60 करोड़ है, जिसमें से ₹459.17 करोड़ की राशि केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी।
इन एक्वापार्क्स का उद्देश्य बीज उत्पादन, चारा निर्माण, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण और विपणन तक की पूरी मत्स्य मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करना है। इससे मत्स्यपालकों को बेहतर बाजार सुविधा, मूल्यवर्धन और भंडारण जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।
राज्यवार लाभ
कुछ प्रमुख राज्यों को इस योजना के अंतर्गत अधिक निवेश और सहायता प्राप्त हुई है:
- आंध्र प्रदेश: ₹2,40,552.67 लाख की परियोजनाएं स्वीकृत, ₹56,331.08 लाख की केंद्रीय सहायता
- केरल: ₹1,34,755.43 लाख की परियोजनाएं, ₹57,743.01 लाख की केंद्र सहायता
- अन्य राज्य: महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, त्रिपुरा, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों को भी विशेष सहयोग
योजना के प्रमुख उद्देश्य
- देश में मत्स्य पालन क्षेत्र को संगठित और आधुनिक बनाना
- पश्च-उत्पादन हानि को कम करना
- निर्यात को बढ़ावा देना
- ब्लू इकोनॉमी को सशक्त करना
