यूएन में भारत ने पेश की तीसरी SDG रिपोर्ट; गरीबी, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल विकास में उल्लेखनीय प्रगति
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पेश की तीसरी VNR रिपोर्ट, SDGs की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति का दावा”
भारत ने सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में अपनी प्रगति को दर्शाते हुए तीसरी स्वैच्छिक राष्ट्रीय समीक्षा (VNR) रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के इकोनॉमिक एंड सोशल काउंसिल के उच्च स्तरीय राजनीतिक मंच (HLPF) पर प्रस्तुत की। यह रिपोर्ट नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी द्वारा पेश की गई।
यह रिपोर्ट 2030 तक SDGs को हासिल करने की दिशा में भारत की संस्थागत प्रतिबद्धता और व्यापक भागीदारी को दर्शाती है। नीति आयोग के समन्वय में तैयार इस रिपोर्ट में राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, नागरिक समाज, विकास साझेदारों और निजी क्षेत्र के योगदान को शामिल किया गया है। इसमें UNDP की तकनीकी सहायता से राज्यों में SDG समन्वय और त्वरित कार्यान्वयन केंद्रों की स्थापना का भी उल्लेख है।
प्रमुख उपलब्धियां:
- गरीबी उन्मूलन: रिपोर्ट के अनुसार, 24.8 करोड़ भारतीय बहुआयामी गरीबी (MPI) से बाहर निकले हैं।
- खाद्य सुरक्षा: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से करोड़ों जरूरतमंदों को पोषण सहायता मिली।
- स्वास्थ्य और पोषण: POSHAN अभियान और आयुष्मान भारत से व्यापक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं और पोषण सुविधाएं दी गईं।
- ऊर्जा संक्रमण: नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, पीएम-कुसुम, और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी योजनाएं देश को स्वच्छ ऊर्जा की ओर ले जा रही हैं।
- आर्थिक नवाचार: भारत अब विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।
- इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: पीएम गतिशक्ति, मेक इन इंडिया, और राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम देश में अगली पीढ़ी की आधारभूत संरचना तैयार कर रहे हैं।
- डिजिटल सेवाएं: जनधन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) ने सेवा वितरण को पारदर्शी और समावेशी बनाया है।
सुशासन और डेटा-संचालित प्रणाली:
- SDG इंडिया इंडेक्स, पूर्वोत्तर क्षेत्र जिला SDG इंडेक्स, और राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक जैसे टूल्स ने प्रदर्शन आधारित प्रशासन को मजबूत किया है।
- आकांक्षी जिलों और आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रमों के जरिए अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
वैश्विक भूमिका:
VNR रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि भारत अब ग्लोबल साउथ के विकासशील देशों को संस्थागत सहायता और क्षमता निर्माण प्रदान करने में अग्रणी बन चुका है। यह दृष्टिकोण भारत की विकसित भारत@2047 की दीर्घकालिक योजना से जुड़ा है, जो स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक एक समावेशी, नवाचारी और सशक्त भारत के निर्माण का लक्ष्य रखता है।
