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“जुलाई 04, मंडी (हिमाचल प्रदेश) – आपदा ने ली तीन जानें, 11 महीने की मासूम रह गई अनाथ“
30 जून और 1 जुलाई को हुई भारी बारिश ने हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में भयंकर तबाही मचाई। जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया, कई लोगों की जान चली गई और कई परिवार बेघर हो गए। इन्हीं त्रासदियों के बीच सराज विधानसभा क्षेत्र के परवाड़ा गांव से एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया।
परवाड़ा गांव में रहने वाले रमेश का घर एक नाले के किनारे स्थित था। 30 जून की रात जब मूसलधार बारिश से नाले का जलस्तर तेजी से बढ़ा, तो रमेश, उनकी पत्नी राधा और वृद्ध मां पूर्णू देवी पानी के बहाव को मोड़ने की कोशिश में घर के पीछे चले गए। उस समय उनकी 11 महीने की बेटी नीकिता घर के अंदर सो रही थी।
अचानक पानी का सैलाब इतना तेज़ हो गया कि रमेश, राधा और पूर्णू देवी उसमें बह गए और उनकी मौत हो गई। जबकि घर किसी चमत्कार से पूरी तरह सुरक्षित रहा और छोटी नीकिता बच गई – लेकिन अनाथ होकर।
यह मर्मांतक घटना न सिर्फ प्राकृतिक आपदा की भयावहता को उजागर करती है, बल्कि एक परिवार के उजड़ने और एक मासूम के जीवन में आई असमय त्रासदी को भी दर्शाती है। प्रशासन द्वारा राहत एवं सहायता के प्रयास जारी हैं, वहीं गांव के लोग इस घटना से गहरे शोक में हैं।