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हिमाचली उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाएगी सरकार: उद्योग मंत्री

पारंपरिक शिल्प और उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का प्रयास: हर्षवर्धन चौहान

मंडी (हिमाचल प्रदेश), 23 जून — प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि पारंपरिक कारीगरों, हथकरघा और हस्तशिल्प से जुड़े शिल्पियों को ऐसा मंच दिया जाए जिससे उनके उत्पादों की पहुंच न केवल देशभर में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक भी सुनिश्चित की जा सके। यह बात हिमाचल प्रदेश के उद्योग, संसदीय कार्य, श्रम एवं रोजगार मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने मंडी के पड्डल मैदान में आयोजित हिमाचल प्रदेश औद्योगिक व्यापार एक्सपो–2025 में मुख्य अतिथि के रूप में कही।

यह एक्सपो भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की खरीद एवं विपणन सहायता योजना (पीएमएस स्कीम) के तहत आयोजित किया गया। मंत्री चौहान ने कहा कि ऐसे आयोजन उन ग्रामीण शिल्पकारों को मंच प्रदान करते हैं जो पारंपरिक और विशिष्ट वस्तुओं का निर्माण करते हैं, और इन प्रदर्शनों में भाग लेने वालों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ होता है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि हिमाचल आने वाले पर्यटक सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहें, बल्कि ग्रामीण इलाकों तक जाकर स्थानीय उत्पादों को पहचानें और प्रोत्साहन दें। राज्य सरकार इन पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक स्वरूप देने और वैश्विक मानकों के अनुसार तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में भी ये टिक सकें।

हिमाचल के शिल्प को मिल रही पहचान:

  • हाल ही में दिल्ली हाट में आयोजित हिमाचली परिधान फैशन शो को लोगों ने सराहा।
  • दिल्ली में आयोजित हाट बाजार में हिमाचल के 28 स्टॉल लगाए गए, जिसमें 8 से 10 हजार करोड़ रुपए तक का व्यापार हुआ।
  • हिमाचल के उत्पादों की हैरिटेज वैल्यू और विविधता ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

मंत्री चौहान ने यह भी कहा कि हिमाचल के ऊनी वस्त्रों का भारत में सीमित बाजार है क्योंकि अधिकांश क्षेत्र गर्म जलवायु वाले हैं,

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