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कृषि भारत के लिए केवल एक आर्थिक गतिविधि नहीं बल्कि करोड़ों परिवारों के लिए आजीविका, भोजन और गरिमा का स्रोत : शिवराज सिंह चौहान

ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की 15वीं बैठक में भारत ने समावेशी एवं सतत कृषि के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई

ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की 15वीं बैठक में शुक्रवार को भारत ने छोटे और सीमांत किसानों को केंद्र में रखकर समावेशी, न्यायसंगत और सतत कृषि को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता जताई। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि केवल आय का साधन नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका, भोजन और सम्मान का आधार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक छोटे किसान सशक्त नहीं होंगे, तब तक वैश्विक भोजन सुरक्षा और ग्रामीण विकास का लक्ष्‍य अधूरा रहेगा।

चौहान ने कहा कि दुनिया में करीब 51 करोड़ छोटे किसान हैं, जो खाद्य प्रणाली की आत्मा हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन, बाजार में अस्थिरता और सीमित संसाधनों से वे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। उन्होंने क्लस्टर आधारित खेती, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), सहकारी मॉडल और प्राकृतिक खेती को इन चुनौतियों का सामना करने के प्रभावी उपाय बताया, जिनसे छोटे किसानों को सामूहिक ताकत और बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी।

भारत के मॉडल के उदाहरण पेश करते हुए उन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की भूमिका पर जोर दिया। COVID‑19 महामारी के दौरान, भारत ने 80 करोड़ नागरिकों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराकर अपनी खाद्य भंडारण क्षमता का सशक्त प्रदर्शन किया था। चौहान ने डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन, एग्री‑स्टैक प्लेटफ़ॉर्म, ड्रोन तकनीक और क्लाइमेट रेज़िलिएंट विलेज प्रोग्राम जैसी तकनीकी पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन नवाचारों से योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ी और किसानों की आय में वृद्धि हुई है।

ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में भारत की पहल ‘लखपति दीदी’ और ‘ड्रोन दीदी’ ने उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। चौहान ने स्मरण कराया कि भारत में महिला सशक्तिकरण सिर्फ एक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक मिशन है।

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास कार्यक्रम (एनएमएसए), राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परियोजना (एनआईसीआरए), वेस्ट टू वेल्थ, सर्कुलर इकोनॉमी, जैव उर्वरक और पारंपरिक खेती जैसी योजनाओं का उल्लेख किया और अन्य ब्रिक्स देशों से इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

इस बैठक में “ब्रिक्स लैंड रिस्टोरेशन पार्टनरशिप” की शुरुआत भी की गई, जिसका उद्देश्य भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण और मिट्टी की उर्वरता में कमी जैसी समस्याओं को दूर करना है। चौहान ने कहा कि यह पहल पारंपरिक कृषि ज्ञान और नवीन वैज्ञानिक तकनीकों को जोड़कर छोटे किसानों, आदिवासी समुदायों और स्थानीय काश्तकारों को लाभान्वित करेगी।

अगले दौर के विशेष कार्यक्रमों के लिए चौहान ने ब्रिक्स देशों को ‘वर्ल्ड फूड इंडिया 2025’ और ‘वर्ल्ड ऑडियो-विजुअल एंटरटेनमेंट समिट 2025’ में भाग लेने का निमंत्रण दिया, ताकि ये मंच नए नवाचारों, साझेदारियों और वैश्विक सहयोग को आगे बढ़ाने में सहायक बनें।

अंत में, सभी ब्रिक्स कृषि मंत्रियों ने एक संकल्प पत्र जारी कर वैश्विक कृषि-खाद्य प्रणाली को न्यायसंगत, समावेशी, नवाचारी और सतत बनाने के अपने सहयोग को पुनः पुष्ट किया।

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