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विश्व धरोहर दिवस: 2024 में 36 लाख पर्यटकों ने गुजरात के हेरिटेज स्थलों का क‍िया दीदार

गुजरात के धरोहर स्थलों ने 2024 में तोड़े रिकॉर्ड, 36 लाख से ज्यादा पर्यटकों ने किया दौरा

साल 2024 गुजरात के ऐतिहासिक स्थलों के लिए खास रहा। ताज़ा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 18 प्रमुख हेरिटेज स्थलों को देश-विदेश से आए करीब 36.95 लाख पर्यटकों ने देखा। इनमें गुजरात के चार यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी शामिल हैं, जो पर्यटकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बने रहे।

सबसे अधिक पर्यटक अहमदाबाद पहुंचे, जहां 7.15 लाख लोगों ने ऐतिहासिक विरासतों का दीदार किया। इसके बाद पाटन की प्रसिद्ध रानी की वाव को 3.64 लाख, सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी धोलावीरा को 1.6 लाख और चंपानेर-पावागढ़ को 47,000 से अधिक पर्यटकों ने देखा।

यूनेस्को की पहचान वाले चार गौरवशाली स्थल

गुजरात के चार धरोहर स्थल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान रखते हैं:

  • चंपानेर-पावागढ़ (2004): यह स्थान हिंदू और इस्लामी वास्तुकला के संगम के रूप में प्रसिद्ध है। यहां स्थित कालिका माता मंदिर श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र है।
  • रानी की वाव (2014): 11वीं सदी की यह भव्य बावड़ी अपनी सुंदर मूर्तिकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह भारत के ₹100 के नोट पर भी छप चुकी है।
  • अहमदाबाद (2017): इसे भारत का पहला यूनेस्को विश्व धरोहर शहर घोषित किया गया था। यह शहर अपनी हवेलियों, मस्जिदों और पारंपरिक गलियों (पोल) के लिए जाना जाता है।
  • धोलावीरा (2021): यह प्राचीन नगर सिंधु घाटी सभ्यता का हिस्सा रहा है और जल प्रबंधन तथा नगर नियोजन की मिसाल पेश करता है।

हेरिटेज टूरिज्म को मिल रही नई दिशा

गुजरात की हेरिटेज टूरिज्म नीति भी इन स्थलों के विकास और संरक्षण में अहम भूमिका निभा रही है। इस नीति के अंतर्गत राज्य में कई पुराने किले, महल और ग्रामीण क्षेत्र की ऐतिहासिक इमारतों को नया जीवन मिल रहा है। सरकार की यह पहल स्थायी पर्यटन और पब्लिक-प्राइवेट साझेदारी को बढ़ावा दे रही है।

विश्व धरोहर दिवस: संरक्षण की याद दिलाने वाला दिन

हर साल 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। इस साल की थीम थी – “आपदा और संघर्ष से जोखिम में धरोहर: भविष्य की तैयारी”, जो बताती है कि कैसे हमें सांस्कृतिक स्थलों को आने वाले खतरों से बचाने की दिशा में सक्रिय रहना चाहिए।

गुजरात का प्रयास न सिर्फ धरोहरों को सहेजने में है, बल्कि उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए बेहतर सुविधाएं और संवेदनशीलता लाने का भी है।


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