अपना शहर चुनेभारत

योगी सरकार का बड़ा कदम, नैमिषारण्य को मिलेगा वैदिक शहर का स्वरूप ; धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा

उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा कदम: नैमिषारण्य को अयोध्या की तर्ज पर विकसित कर बनेगी भव्य वैदिक नगरी

उत्तर प्रदेश सरकार अब नैमिषारण्य (जनपद सीतापुर) को अयोध्या की तर्ज पर विकसित कर एक भव्य वैदिक नगरी में बदलने की तैयारी में है। इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के साथ-साथ उसकी प्राचीनता और आध्यात्मिक गरिमा को भी संरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2023 में गांधी जयंती से एक दिन पहले नैमिषारण्य पहुंचकर संतों से मुलाकात की थी और उन्हें आश्वासन दिया था कि विकास कार्यों के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं होगी। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने “नैमिषारण्य तीर्थ परिषद” का गठन किया है। यह परिषद योजनाबद्ध तरीके से क्षेत्र के धार्मिक, सांस्कृतिक और बुनियादी ढांचे का विकास करेगी।

सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढांचे का विकास

  • राजघाट और दशाश्वमेध घाट के बीच एक नया घाट बनाया जा रहा है।
  • पुराने घाटों का सौंदर्यीकरण और पुनर्निर्माण कार्य जारी है; कुछ घाटों का कार्य पूर्ण हो चुका है।
  • क्षेत्र की सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है ताकि आवागमन सुगम हो सके।
  • लालिता देवी, भूतश्वरनाथ समेत अन्य प्राचीन मंदिरों को भी विकास योजना में शामिल किया गया है।

मूलभूत सुविधाएं और सुरक्षा उपाय

सरकार यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार करेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि संतों की भावनाओं का सम्मान किया जाएगा और विकास कार्यों में क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को संरक्षित रखा जाएगा।

जल्द शुरू होगी हेलीकॉप्टर सेवा

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नैमिषारण्य को अन्य धार्मिक स्थलों से जोड़ने हेतु हेलीकॉप्टर सेवा भी जल्द शुरू की जाएगी।

  • ठाकुरनगर रुद्रवर्त धाम मार्ग पर 9 करोड़ रुपये की लागत से एक हेलीपोर्ट तैयार किया गया है, जहां एक साथ तीन हेलिकॉप्टर उतर सकेंगे।
  • यह सेवा लखनऊ, अयोध्या और वाराणसी जैसे शहरों से नैमिषारण्य को सीधे जोड़ेगी।
  • इसके अलावा रेल और सड़क संपर्क को भी और बेहतर बनाया जाएगा।

नैमिषारण्य का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

नैमिषारण्य गोमती नदी के किनारे स्थित एक पवित्र स्थल है, जिसे 88 हजार ऋषियों की तपोभूमि माना जाता है।

  • कहा जाता है कि महापुराणों की रचना यहीं हुई थी और पहली बार सत्यनारायण कथा का पाठ भी यहीं किया गया था।
  • भगवान राम ने यहीं अश्वमेध यज्ञ किया था।
  • यह स्थान महर्षि वाल्मीकि, लव-कुश, युधिष्ठिर और अर्जुन से भी जुड़ा हुआ है।
  • चार धाम यात्रा में नैमिषारण्य के दर्शन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

इस ऐतिहासिक पहल से नैमिषारण्य को न केवल वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान मिलेगी, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को भी सशक्त आधार प्राप्त होगा।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *