भारत, श्रीलंका ने महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण, खनन क्षेत्र में संबंध मजबूत करने पर की चर्चा
“भारत और श्रीलंका ने महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण और खनन क्षेत्र में संबंध मजबूत करने पर चर्चा की“
भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के अन्वेषण और खनन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की गई। इस बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने पारस्परिक लाभ के लिए रणनीतिक साझेदारी विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया।
खनिज संसाधनों पर सहयोग का महत्व
भारत और श्रीलंका दोनों ही खनिज संपदाओं से समृद्ध देश हैं। विशेष रूप से, श्रीलंका में दुर्लभ पृथ्वी तत्व (Rare Earth Elements) और ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं, जो वैश्विक प्रौद्योगिकी और उद्योगों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। वहीं, भारत के पास खनन और खनिज प्रसंस्करण की अत्याधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं, जिससे श्रीलंका को इन संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिल सकती है।
बैठक के प्रमुख बिंदु
- संयुक्त अन्वेषण परियोजनाएं – भारत और श्रीलंका ने संयुक्त रूप से दुर्लभ खनिजों की खोज और दोहन के लिए सहयोग पर चर्चा की।
- तकनीकी और वैज्ञानिक आदान-प्रदान – भारतीय खनन कंपनियां और अनुसंधान संस्थान श्रीलंका को आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञता में सहायता प्रदान कर सकते हैं।
- नवाचार और सतत विकास – खनन क्षेत्र में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए टिकाऊ तरीकों को अपनाने पर भी जोर दिया गया।
- व्यापार और निवेश को बढ़ावा – भारतीय कंपनियों द्वारा श्रीलंका में खनिज अन्वेषण और खनन के क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने पर सहमति बनी।
भविष्य की संभावनाएं
यह साझेदारी न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को सुदृढ़ करेगी बल्कि क्षेत्रीय व्यापार और औद्योगिक विकास को भी गति देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सहयोग से न केवल खनिज संसाधनों का प्रभावी उपयोग संभव होगा, बल्कि यह भारत और श्रीलंका के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
इस बैठक के परिणामस्वरूप दोनों देशों के संबंधित मंत्रालयों और कंपनियों के बीच आगे की चर्चाओं और समझौतों की संभावना प्रबल हो गई
