ऑथर और स्पीकर शेफाली वैद्य ने साझा किया महाकुम्भ का अनुभव
“महाकुंभ 2025: आस्था, सेवा और समर्पण का महायज्ञ“
महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, सेवा और समर्पण का एक विशाल संगम है। यह आयोजन दो प्रकार के लोगों का होता है—वे जो श्रद्धा और विश्वास के साथ आते हैं, और वे जो सेवा के लिए समर्पित रहते हैं। यह विचार प्रसिद्ध लेखिका और वक्ता शेफाली वैद्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए।
सच्चे तीर्थयात्री: आस्था के प्रतीक
शेफाली वैद्य का मानना है कि महाकुंभ उन श्रद्धालुओं का होता है, जो केवल आस्था के साथ आते हैं। वे संगम में पवित्र स्नान के लिए घंटों प्रतीक्षा करते हैं, गंगाजल को श्रद्धा से घर ले जाते हैं, और किसी प्रकार की शिकायत किए बिना सिर्फ विश्वास के साथ कुम्भ में शामिल होते हैं। उनके लिए यह स्नान मात्र एक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और मोक्ष का माध्यम होता है।
सेवा भाव: जो देने आते हैं, लेने नहीं
महाकुंभ उन समर्पित सेवकों का भी होता है, जो यहां कुछ मांगने नहीं, बल्कि देने आते हैं। लाखों सफाई कर्मी, पुलिसकर्मी, बचाव दल, बस ड्राइवर, भंडारे में सेवा देने वाले लोग, डॉक्टर और चिकित्सा कर्मी, मल्लाह—all महाकुंभ को सफल बनाने के लिए दिन-रात कार्यरत रहते हैं। ये सभी सेवक बिना किसी स्वार्थ के इस महायज्ञ में अपनी भूमिका निभाते हैं।
महाकुंभ: एक जीवंत धड़कन
शेफाली वैद्य का कहना है कि जो महाकुंभ को देखने, समझने और अनुभव करने आते हैं, वे केवल दर्शक होते हैं। लेकिन यह आयोजन उन्हीं का होता है, जो श्रद्धा और सेवा के साथ इससे जुड़े होते हैं। महाकुंभ मात्र एक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा का स्पंदन है, जो हर 12 वर्षों में आस्था, भक्ति और सेवा के अनूठे संगम के रूप में प्रकट होता है।
महाकुंभ 2025 न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह भारतीय परंपरा, सामाजिक समरसता और निःस्वार्थ सेवा की मिसाल भी पेश करता है।
