मौनी अमावस्या पर प्रयागराज के रेलवे स्टेशनों पर प्रवेश और निकास की विशेष योजना
“महापर्व महाकुंभ: मौनी अमावस्या पर संगम तट पर 10 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की तैयारी“
प्रयागराज के संगम तट पर महाकुंभ का दिव्य और भव्य आयोजन जारी है। अब तक 13 करोड़ से अधिक श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान कर चुके हैं। महाकुंभ के सबसे बड़े पर्व, मौनी अमावस्या का आयोजन आगामी 29 जनवरी को होगा, जिसमें लगभग 10 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध
श्रद्धालुओं की भारी संख्या को ध्यान में रखते हुए प्रयागराज रेल मंडल ने विशेष योजनाएं और प्रबंध किए हैं। 25 जनवरी से ही महाकुंभ में प्रतिदिन करीब 1 करोड़ श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मौनी अमावस्या के दौरान सुरक्षा और निकासी को सुगम बनाने के लिए सभी प्रमुख स्टेशनों पर व्यवस्थाएं की गई हैं।
प्रमुख स्टेशनों पर यातायात प्रबंधन:
- प्रयागराज जंक्शन:
- प्रवेश: सिटी साइड, प्लेटफॉर्म नंबर 1 की ओर से।
- निकास: सिविल लाइंस साइड, प्लेटफॉर्म नंबर 6 की ओर से।
- आरक्षित यात्री: सिटी साइड के गेट नंबर 5 से प्रवेश।
- अनारक्षित यात्री: दिशावार कलर कोडेड आश्रय स्थलों से प्रवेश।
- नैनी जंक्शन:
- प्रवेश: स्टेशन रोड से।
- निकास: मालगोदाम की ओर।
- आरक्षित यात्री: गेट नंबर 2 से प्रवेश।
- प्रयागराज छिवकी स्टेशन:
- प्रवेश: सीओडी मार्ग (प्रयागराज-मिर्जापुर राजमार्ग)।
- निकास: जीईसी नैनी रोड की ओर।
- आरक्षित यात्री: गेट नंबर 2 से प्रवेश।
- सूबेदारगंज स्टेशन:
- प्रवेश: झलवा, कौशाम्बी रोड की ओर।
- निकास: जीटी रोड की ओर।
- आरक्षित यात्री: गेट नंबर 3 से प्रवेश।
अनारक्षित यात्रियों के लिए विशेष प्रबंध:
- सभी प्रमुख स्टेशनों पर दिशावार कलर कोडेड आश्रय स्थल बनाए गए हैं।
- आश्रय स्थलों में अनारक्षित टिकट काउंटर, एटीवीएम, और मोबाइल टिकटिंग की सुविधा दी गई है।
- यात्रियों को गंतव्य स्टेशन के अनुसार अलग-अलग रंग के टिकट प्रदान किए जाएंगे।
विशेष सुविधाएं:
- खुसरो बाग में होल्डिंग एरिया: 1 लाख श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था।
- मेला स्पेशल ट्रेनें: गंतव्य स्टेशन तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन।
मौनी अमावस्या पर संगम में स्नान और महाकुंभ के आयोजन के लिए की जा रही ये व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देती हैं। यह आयोजन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत बनाए रखने का एक अभूतपूर्व उदाहरण है।
