शिमला: राज्य सरकार हरित ऊर्जा के दोहन के लिए बड़े कदम उठा रही है – मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि 72 मेगावाट क्षमता की सात सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं और इनका मूल्यांकन किया जा रहा है। जल्द ही इन परियोजनाओं का कार्य सम्बन्धित कंपनियों को सौंप दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि 325 मेगावाट क्षमता की आठ अन्य सौर ऊर्जा परियोजनाओं का सर्वेक्षण और जांच जारी है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने राज्य की 200 पंचायतों को ‘हरित पंचायत’ के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इन पंचायतों में 200 केवी के ग्राउंड माउंटेड सोलर प्लांट लगाए जाएंगे। इन सोलर प्लांट से होने वाली आय पंचायत के विकास कार्यों में उपयोग की जाएगी।

सौर ऊर्जा परियोजनाओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि ऊना जिले की पेखुबेला सौर ऊर्जा परियोजना को 15 अप्रैल 2024 को जनता को समर्पित किया गया था। यह परियोजना अप्रैल से अक्तूबर 2024 तक की अवधि में 34.19 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन कर चुकी है, जिससे 10.16 करोड़ रुपये की आय हुई है।

इसके अलावा, भंजाल (ऊना) में 5 मेगावाट की एक और सौर ऊर्जा परियोजना को 30 नवंबर 2024 को शुरू किया गया है। साथ ही 10 मेगावाट क्षमता की अघलौर सौर ऊर्जा परियोजना का निर्माण कार्य भी इस महीने पूरा होने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हिमाचल प्रदेश को 2026 तक देश का पहला ‘हरित ऊर्जा राज्य’ बनाया जाए। इससे न केवल पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकेगा बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। उन्होंने बताया कि हरित ऊर्जा स्रोत अक्षय होते हैं, जो कभी खत्म नहीं होते। इसके माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को ऊर्जा की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

जलवायु परिवर्तन के खतरे को कम करने के लिए हरित ऊर्जा के महत्त्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में 2 टन प्रतिदिन की क्षमता वाला कम्प्रेस्ड बायो-गैस प्लांट स्थापित करने की योजना का ड्राफ्ट डीपीआर तैयार किया जा चुका है।

इसके साथ ही बाल एवं बालिका आश्रमों, वृद्ध आश्रमों और राजीव गांधी मॉडल डे-बोर्डिंग स्कूलों में ग्रिड से जुड़े रूफ टॉप सोलर प्लांट और वॉटर हीटिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इससे इन संस्थानों में ऊर्जा की खपत में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरित ऊर्जा के दोहन से प्रदेश के विकास को नई दिशा मिलेगी और राज्य आत्मनिर्भर बनेगा। उन्होंने जोर दिया कि इस पहल से हिमाचल प्रदेश न केवल पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाएगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल भी कायम करेगा।

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