सुप्रीम कोर्ट: आत्महत्या के मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए स्पष्ट सबूत जरूरी

बेंगलुरु में एक इंजीनियर द्वारा पत्नी और ससुराल वालों की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या करने का मामला चर्चा में बना हुआ है। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामलों में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में किसी को दोषी ठहराने के लिए केवल उत्पीड़न का आरोप पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए स्पष्ट और ठोस सबूत होना अनिवार्य है।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ ने की। यह फैसला उस याचिका पर सुनाया गया, जिसमें गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी। याचिका में एक महिला को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में उसके पति और सास-ससुर को आरोपमुक्त करने की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध में दोषी सिद्ध करने के लिए मजबूत सबूतों का होना जरूरी है। केवल उत्पीड़न का आरोप या परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर्याप्त नहीं माने जा सकते। कोर्ट ने इस टिप्पणी के जरिए साफ किया कि ऐसे मामलों में साक्ष्यों की व्यापक जांच जरूरी है ताकि निर्दोष व्यक्तियों को झूठे मामलों में फंसने से बचाया जा सके।

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