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नई दिल्ली – ‘कावेरी मीट्स गंगा’: सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक प्रतिभा की एक मंत्रमुग्ध कर देने वाली शाम

कावेरी मीट्स गंगा’ उत्सव: संस्कृति मंत्रालय की अमृत परम्परा श्रृंखला का शानदार आयोजन

संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित अमृत परम्परा श्रृंखला के अंतर्गत, दिल्ली के कर्त्तव्य पथ और सीसीआरटी द्वारका में ‘कावेरी मीट्स गंगा’ उत्सव के तीसरे दिन भी सांस्कृतिक समृद्धि और विविधता का अद्वितीय प्रदर्शन किया गया। इस उत्सव ने भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के विभिन्न पहलुओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया, और एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को नया आयाम दिया।

‘कावेरी मीट्स गंगा’ का आयोजन भारतीय सभ्यता की दो महान नदियों — कावेरी और गंगा — के प्रतीकात्मक संगम को दिखाता है, जो न केवल सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि भारतीय समाज की एकता और विविधता का भी प्रतीक हैं। इस विशेष उत्सव में पारंपरिक और लोक कलाओं का दृश्यांकन किया गया, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता और उसके अद्वितीय लोक-जीवन को दर्शाता है।

इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आई कलाकारों और संस्कृतिकर्मियों ने अपने अद्वितीय प्रदर्शनों के माध्यम से भारत की संस्कृति, कला और परंपराओं को जीवित रखा। लोक संगीत, नृत्य, शिल्पकला, और पारंपरिक कला रूपों के साथ, यह उत्सव दर्शकों को भारतीय कला और संस्कृति की गहरी समझ और सराहना प्रदान करता है। विशेष रूप से दिल्ली के कर्त्तव्य पथ पर यह आयोजन सांस्कृतिक विविधता और एकता के प्रतीक के रूप में सामने आया, जहां विभिन्न भारतीय राज्यों और क्षेत्रों से जुड़े कलाकारों ने अपनी पारंपरिक धरोहर को प्रस्तुत किया।

‘कावेरी मीट्स गंगा’ उत्सव न केवल एक सांस्कृतिक महोत्सव था, बल्कि यह भारतीय समाज के अंतर्निहित मूल्यों और परंपराओं को पुनः जीवित करने का एक प्रयास भी था। इस आयोजन के माध्यम से भारतीय कला और संस्कृति को एक मंच पर लाकर, एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को प्रोत्साहित किया गया। यह उत्सव भारत की विविध सांस्कृतिक धारा को एकजुट करने और उस धारा में निहित गहरे प्रतीकों को आम जनमानस तक पहुँचाने का अद्भुत प्रयास था।

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