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मुद्दा – आखिर कब रुकेंगे खूनी सड़को पर दर्दनाक हादसे ?

“सड़क हादसों की बढ़ती घटनाएं: दो दिन में कई जाने गईं, दर्जनों घायल”

बीते दो-तीन दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में सड़क हादसों ने कई जिंदगियां छीन लीं और कई परिवारों को गहरा आघात दिया।

अलीगढ़ (यमुना एक्सप्रेसवे):
बस और ट्रक के बीच हुई भिड़ंत में 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 15 से अधिक लोग घायल हो गए। यह घटना यमुना एक्सप्रेसवे पर हुई, जहां दुर्घटना के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया।

राजस्थान (पाली-जोधपुर हाईवे):
एक मरीज को एक एम्बुलेंस से दूसरी में शिफ्ट करने के दौरान डंपर ने टक्कर मार दी। इस हादसे में चार लोगों की जान चली गई।

दिल्ली (सिग्नेचर ब्रिज):
सिग्नेचर ब्रिज पर हुए एक दर्दनाक हादसे में जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय के दो मेडिकल छात्रों की मौत हो गई। यह घटना तेज रफ्तार और लापरवाही का नतीजा मानी जा रही है।

लखनऊ:
राजधानी लखनऊ में दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में एक वृद्ध महिला समेत दो लोगों की जान गई।

उत्तराखंड (देहरादून):
12 नवंबर को देहरादून में हुए सड़क हादसे में छह छात्रों की मौत हो गई। यह घटना छात्रों के परिवारों के लिए एक बड़ी त्रासदी साबित हुई।

सड़क हादसों की यह बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय हैं। तेज रफ्तार, लापरवाही और यातायात नियमों का पालन न करना इनमें मुख्य कारण माने जा रहे हैं। ऐसे हादसे हर साल हजारों जिंदगियां ले लेते हैं। सड़क सुरक्षा के नियमों का सख्ती से पालन और लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि इन घटनाओं को रोका जा सके।

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