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भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में एक बयान में चीन के साथ संबंधों के बारे में अपनी गहरी और विचारशील दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उनके बयान ने चीन के पूर्व नेता माओ जेडॉन्ग की प्रसिद्ध “5 उंगलियां” नीति का उल्लेख किया, जो इस बात का संकेत दे सकती है कि भारत और चीन के बीच के संबंधों में क्या चल रहा है।
माओ की 5 उंगलियों का संदर्भ:
- माओ जेडॉन्ग ने एक बार कहा था कि चीन को अपनी ताकत बढ़ाने के लिए उसे अपने पड़ोसी देशों को “5 उंगलियों” की तरह समझना होगा, जहां प्रत्येक उंगली एक देश का प्रतिनिधित्व करती है।
- यह दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि चीन ने अपने पड़ोसी देशों पर प्रभाव बनाने की कोशिश की है, जिससे उसे क्षेत्रीय शक्ति और रणनीतिक लाभ मिल सके।
जयशंकर का बयान:
- जयशंकर ने चीन के साथ भारत के रिश्तों के बारे में बात करते हुए यह संकेत दिया कि भारत ने माओ की इस नीति को समझ लिया है और उसे चुनौती देने का प्रयास कर रहा है।
- उन्होंने कहा कि भारत अपने स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा को बनाए रखने के लिए स्पष्ट रूप से खड़ा है।
भारत-चीन संबंध:
- भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और आर्थिक प्रतिस्पर्धा दोनों ही जटिलताओं का कारण बने हैं।
- जयशंकर के बयान ने यह स्पष्ट किया है कि भारत इन चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।
चिंतन करने का विषय:
- जयशंकर के इस बयान ने कई सवाल उठाए हैं। क्या भारत वास्तव में माओ की “5 उंगलियों” की नीति को समझते हुए उसके खिलाफ कदम उठाने में सक्षम है?
- क्या चीन की रणनीति वास्तव में अपने पड़ोसियों को कमजोर करने के लिए काम कर रही है, या भारत के प्रति उसकी नीतियों में कुछ बदलाव आ रहे हैं?