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इटली की सरकार ने हमास समर्थक जहरीले इमाम को देश से निकाला, वापस भेजा जाएगा पाकिस्तान

इटली की सरकार ने हाल ही में एक कट्टरपंथी इमाम को देश से निष्कासित कर दिया, जो हमास का समर्थक होने के साथ-साथ इटली के खिलाफ भी नफरत फैलाने का काम कर रहा था। इस इमाम का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इटली की सुरक्षा एजेंसियों ने उसे “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा” मानते हुए त्वरित कार्रवाई की। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह इमाम पाकिस्तानी नागरिक है, और उसे जल्द ही पाकिस्तान वापस भेजा जाएगा।

हमास का समर्थन और कट्टरपंथी विचारधारा

इटली की सुरक्षा एजेंसियों को इस इमाम के बारे में जानकारी तब मिली जब वह मस्जिदों और अन्य धार्मिक सभाओं में हमास का समर्थन करता पाया गया। हमास, जो कि फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन है, हाल ही में इजरायल के खिलाफ अपने हमलों को लेकर वैश्विक आलोचना का शिकार हो रहा है। इमाम के उपदेशों में उसने न केवल हमास के आतंकवादी हमलों का समर्थन किया बल्कि इटली की सरकार और पश्चिमी देशों के खिलाफ भी जहर उगला।

इटली के खिलाफ जहर उगलने की वजह से कार्रवाई

इमाम के भाषणों और गतिविधियों पर नज़र रखने के बाद, इटली की खुफिया एजेंसियों ने यह पाया कि वह स्थानीय मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बना रहा था। उसके उपदेशों में इटली और अन्य पश्चिमी देशों के खिलाफ हिंसा और घृणा फैलाने की बातें शामिल थीं। इटली के कानून के तहत इस तरह की गतिविधियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जाता है। इस आधार पर, इटली के गृह मंत्रालय ने तुरंत उसे देश से निष्कासित करने का फैसला किया।

कहाँ जाएगा इमाम?

यह इमाम पाकिस्तानी मूल का नागरिक है, इसलिए उसे वापस पाकिस्तान भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पाकिस्तानी अधिकारियों से संपर्क किया जा चुका है, और संभावना है कि आने वाले कुछ दिनों में उसे पाकिस्तान भेज दिया जाएगा। हालाँकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान में इमाम के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी, या वह वहाँ भी अपनी कट्टरपंथी गतिविधियों को जारी रखेगा।

इटली का सख्त संदेश

इटली की सरकार ने इस कार्रवाई के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह देश की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। कट्टरपंथी विचारधारा और हिंसा को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, चाहे वे किसी भी देश के नागरिक क्यों न हों। इटली के इस कदम को यूरोप में बढ़ते कट्टरपंथ के खिलाफ एक सख्त प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है, जहां कई देश इसी तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं।

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