सोने की चमक में भारत की भागीदारी बढ़ी, 23 ट्रिलियन डॉलर के बाजार में 15% हिस्सेदारी
“सोना बना सुरक्षित निवेश का केंद्र, वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार 12.5 ट्रिलियन डॉलर के आसपास“
डीएसपी म्यूचुअल फंड की ताज़ा “नेत्रा रिपोर्ट” के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार वर्तमान में लगभग 12.5 ट्रिलियन डॉलर का है, जबकि वैश्विक सोने का बाजार मूल्य 23 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। दिलचस्प बात यह है कि इस सोने का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा भारत में मौजूद है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अब तक निकाले गए कुल सोने का 65 प्रतिशत हिस्सा आभूषणों के रूप में प्रयोग हो रहा है, जबकि वैश्विक भंडार का केवल 5 प्रतिशत ही सोने में परिवर्तित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अनुपात बढ़ा, तो सोने की कीमतों में निरंतर और तेज़ बढ़ोतरी संभव है।
केंद्रीय बैंक बढ़ा रहे हैं सोने की खरीद
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने इतिहास में सबसे ज्यादा सुरक्षित संपत्तियों की खरीद की है।
- 2000 से 2016 तक की कुल खरीद: 85 बिलियन डॉलर
- केवल 2024 में ही खरीद: 84 बिलियन डॉलर
वर्ष 2022 से हर साल, केंद्रीय बैंक लगभग 1,000 टन सोना खरीद रहे हैं, जो दुनिया की वार्षिक खनन आपूर्ति का एक चौथाई से अधिक है।
क्यों बढ़ी सोने की मांग?
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की अस्थिरता और वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताओं ने सोने को एक भरोसेमंद विकल्प बना दिया है।
भारत की स्थिति
- भारतीय रिजर्व बैंक के पास अभी 880 मीट्रिक टन सोना है।
- वित्त वर्ष 2026 में भारत ने अब तक नया सोना नहीं खरीदा है।
- विश्लेषकों का मानना है कि भारत सोने की कीमतों में स्थिरता की प्रतीक्षा कर रहा है, क्योंकि पिछले पांच वर्षों में सोने की कीमतों में 80% से अधिक वृद्धि देखी गई है।
अन्य वैश्विक संकेत
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि:
- यूरोपियन यूनियन (EMU) की वित्तीय स्थिति कमजोर बनी हुई है।
- चीनी युआन अभी वैश्विक रिजर्व मुद्रा के रूप में पूर्णतः स्वीकृत नहीं है।
भारत में कॉर्पोरेट संकेतक मजबूत
रिपोर्ट में भारत के ऑपरेटिंग कैश फ्लो मार्जिन (OCF Margin) में सुधार को सकारात्मक माना गया है, जो देश के पूंजी आवंटन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के बेहतर भविष्य की ओर संकेत करता है।
