पुस्तक समीक्षा: ‘वो 17 दिन’ – त्रासदी का सजीव और रोचक वर्णन

हर किसी की नजर सरकार पर टिकी हुई थी। देशभर में हर व्यक्ति बस उस घटना की ही चर्चा कर रहा था। इसी घटना को पुस्तक का रूप दिया है कुमार राजीव रंजन सिंह ने, और इसका संपादन अमित कुमार ने किया है। पुस्तक का प्रकाशन डायमंड बुक्स द्वारा किया गया है।

त्रासदी का जीवंत चित्रण

किसी ऐतिहासिक त्रासदी को रोचक तरीके से प्रस्तुत करना और उसमें हकीकत की सजीवता बनाए रखना एक लेखक के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। ‘वो 17 दिन’ इसी चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करती है। लेखक ने अपनी लेखनी में न केवल घटनाओं को सिलसिलेवार ढंग से प्रस्तुत किया है, बल्कि पाठकों को हर पन्ने के साथ उस त्रासदी का साक्षी बना दिया है।

लेखक का परिचय

कुमार राजीव रंजन सिंह छात्र जीवन से ही राजनीतिक और राष्ट्रीय मुद्दों में गहरी रुचि रखते थे। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ा। उनका मुख्य उद्देश्य युवाओं को सशक्त बनाना और उनके मुद्दों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना रहा है।

वर्ष 2007 में राजीव रंजन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के एनजीओ ‘युवा.. एक आंदोलन’ की स्थापना की। इसके अलावा, उन्होंने महात्मा गांधी युवा सूचना केंद्र (MYGYIC-COM) की शुरुआत भी की।

युवाओं के लिए प्रेरणादायक

राजीव रंजन का सशक्त व्यक्तित्व और उनके प्रयास युवाओं के सशक्तीकरण की दिशा में उल्लेखनीय हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की परिवर्तनकारी संभावनाओं और युवाओं के प्रति उनकी गंभीरता को देखते हुए राजीव रंजन ‘यंग इंडिया’ से भी जुड़े।

निष्कर्ष

‘वो 17 दिन’ सिर्फ एक त्रासदी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस समय के हालात, सरकार की चुनौतियों और लोगों की भावनाओं को सजीवता से प्रस्तुत करती है। पुस्तक हर वर्ग के पाठकों के लिए एक जरूरी दस्तावेज है, जो न केवल जानकारीपूर्ण है, बल्कि प्रेरणादायक भी है।

यह पुस्तक निश्चित रूप से पढ़ने लायक है।

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