ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना से उत्तराखंड की कनेक्टिविटी में होगा बड़ा बदलाव, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
“ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना: उत्तराखंड में कनेक्टिविटी और पर्यटन को नई रफ्तार“
देहरादून/ऋषिकेश — उत्तराखंड के विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना राज्य की पर्वतीय कनेक्टिविटी को नया आयाम देने जा रही है। इस परियोजना के पूरा होने से जहां स्थानीय लोगों के लिए यात्रा सुगम होगी, वहीं पर्यटन और तीर्थाटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
125 किलोमीटर लंबी रेल लाइन पहाड़ से जोड़ेगी मैदान
यह रेल लाइन करीब 125 किलोमीटर लंबी होगी और यह ऋषिकेश को कर्णप्रयाग से जोड़ते हुए देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गौचर जैसे प्रमुख शहरों और कस्बों को जोड़ेगी। यह मार्ग हिमालयी क्षेत्रों में रेल के जरिए पहली बार बड़े पैमाने पर संपर्क स्थापित करेगा।
कई सुरंगें और पुलों का निर्माण
परियोजना का बड़ा हिस्सा सुरंगों और पुलों के जरिए तय किया जा रहा है, जिससे भूगर्भीय और भौगोलिक चुनौतियों से निपटा जा सके। लगभग 85% मार्ग सुरंगों से होकर गुजरेगा, जिससे यात्रा सुरक्षित और तेज़ हो सकेगी।
पर्यटन और तीर्थाटन को मिलेगा नया बल
ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच सीधा रेल संपर्क बनने से चारधाम यात्रा का मार्ग अधिक सुगम होगा। यात्रियों को केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे पवित्र स्थलों तक पहुँचने में कम समय लगेगा। इसके अलावा एडवेंचर टूरिज्म, योग-ध्यान केंद्रों और प्राकृतिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी।
स्थानीय रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा
इस रेल परियोजना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। निर्माण, परिवहन और पर्यटन क्षेत्रों में काम की संभावनाएं बनेंगी। इसके साथ ही क्षेत्र के फल, सब्ज़ी, और हस्तशिल्प उत्पादों को बाहरी बाजारों तक पहुँचने में आसानी होगी।
पर्यावरणीय संतुलन का भी रखा गया ध्यान
रेल मार्ग निर्माण के दौरान पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। निर्माण में आधुनिक तकनीकों का उपयोग हो रहा है जिससे पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र पर कम असर पड़े।
